केंद्रीय अंगुली छाप ब्यूरो

"चेहरा झूट बोल सकता है अंगुली चिन्ह नहीं"

अंगुल चिन्ह विज्ञान की उत्पति

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यह विचार कि अंगुलियों के निशान को व्यक्तिगत पहचान के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, सबसे पहले 1858 में, बंगाल प्रांत के हुगली जिले के जिला मजिस्ट्रेट, सर विलियम हर्शल द्वारा सामने रखा गया था। बाद में, डॉ. हेनरी फॉल्ड्स ने अपराध स्थल पर पाया गया गुप्त प्रिंटों से किसी अपराधी का पता लगाने का विचार दिया और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि किन्हीं दो उंगलियों के निशान एक जैसे नहीं होते। हर्शेल और फॉल्ड्स के विचारोंके आधार पर, प्रसिद्ध अंग्रेजी वैज्ञानिक, सर फ्रांसिस गैल्टन ने फिंगर प्रिंट में विशिष्टता और स्थायित्व के बुनियादी सिद्धांतों को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया। समकालीन भारत में,सर एडवर्ड रिचर्ड हेनरी, पुलिस महानिरीक्षक, बंगाल, ने दो भारतीय अधिकारियों, खान बहादुर अज़ीज़ुल हक और राय बहादुर हेमचंद्र बोस की सक्षम सहायता से, उंगलियों के निशान के वर्गीकरण की एक प्रणाली विकसित की, जिससे मानवशास्त्रीय प्रणाली को त्याग दिया गया। तदुपरांत दुनिया का पहला फिंगर प्रिंट ब्यूरो वर्ष 1897 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में राइटर्स बिल्डिंग में स्थापित किया गया था।

केन्द्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो (के.अ.चि.ब्यूरो) की स्थापना

केन्द्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो 1955 में,कोलकाता में आसूचना ब्यूरो के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन अस्तित्व के आया। 1976 में प्रशासनिक नियन्त्रण केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को स्थानांतरित हो गया और जुलाई 1986 में अंततः के.अ.चि.ब्यूरो नवगठित राष्ट्रीय अपराध रिकाँर्ड ब्यूरो के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन में कर दिया गया और वर्तमान में यह एन.सी.आर.बी. मुख्यालय, महिपालपुर, नई दिल्ली-37 मे स्थित है।

प्रकार्यात्मक भूमिका एवं प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियाँ

के.अ.चि.ब्यूरो भारत में फिंगरप्रिंट से संबंधित सभी मामलों पर सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करता है।के.अ.चि.ब्यरो के मुख्य कार्य अपराधियों के अंगुल चिन्ह, राष्ट्रीय एव अन्तर राष्ट्रीय के डाटाबेस को संभाल कर रखना और सूचना को प्रसारित करना है। इसका उद्देश्य है:

  • • अंगुल चिन्ह रिकाँर्ड स्लिप(जिन्हे अब कंप्यूटरीकृत कर दिया है) को संभाल कर रखना, के.अ.चि. ब्यूरो की अपराध अनुसूची के अंर्तगत आने वाले भारतीय और विदेशी दोष सिद्ध अपराधियों और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के इंटरपोल प्रभाग और स्वापक नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली दारा भेजे गए अन्तर राष्ट्रीय अपराधियों के रिकार्ड का अनुरक्षण करना।
  • • केन्द्रीय सरकार के विभागों और भारत सरकार के उपक्रमों द्वारा (विचारार्थ ) भेजे गए संदिग्ध अंगुल चिन्हों की जाँच करना।
  • • अंगुल चिन्ह विज्ञान (सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक) में पुलिस और भारत में राज्य सरकारों के गैर-पुलिस कार्मिकों को अंगुल चिन्ह, NAFIS, और अन्य पाठ्यक्रमों परप्रशिक्षण प्रदान करना।
  • • राज्य अंगुल चिन्ह ब्यूरो के कार्य में समन्वय एवं अंगुल चिन्ह से संबंधित सभी मामलों में आवश्यक मार्गदर्शन करना।
  • • अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों के प्रत्यायन हेतु प्रत्येक वर्ष अखिल भारतीय बोर्ड परीक्षा (1956 से) का संचालन करना। इस परीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करने के लिए आयोजित किया जाता है कि उम्मीदवारों के पास अंगुल चिन्ह विज्ञान और इसके अनुप्रयोगों का प्रदर्शित और अपेक्षित ज्ञान है।
  • • अखिल भारतीय पुलिस ड्यूटी मीट (1958 से) में अंगुल चिन्ह विज्ञान में प्रत्येक वर्ष प्रतियोगिता का संचालन करना।
  • • वार्षिक पत्रिका भारत में अंगुल चिन्ह का प्रकाशन करना जो देश में सभी अंगुल चिन्ह ब्यूरो के कार्य एवं गतिविधियों का गहन अध्ययन है।
  • • वार्षिक 'फिंगर प्रिंट ब्यूरो के निदेशकों का अखिल भारतीय सम्मेलन' आयोजित करना। सम्मेलन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के फिंगर प्रिंट ब्यूरो के 100 से अधिक प्रतिनिधि, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के अनुसंधान विद्वान और केंद्रीय फिंगर प्रिंट ब्यूरो/एनसीआरबी के अधिकारी भाग लेते हैं। इस वार्षिक मण्डली के उद्देश्यों में देश में फिंगर प्रिंट विज्ञान से संबंधित सभी मामलों पर विचार-मंथन सत्र शामिल हैं, जिनमे प्रशासनिक, परिचालन, कानूनी, तकनीकी और अनुसंधान एवं विकास पहलू शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वचालित फ़िंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS)

NAFIS, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संकल्पित और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा कार्यान्वितएक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य आपराधिक फ़िंगरप्रिंट का एक मजबूत ऑनलाइन खोज योग्य डेटाबेस स्थापित करना है, जो वर्तमान में 1 करोड़ की गिनती को पार कर चुका है। NAFIS प्रणाली, कई पुराने मामलों को सुलझाने में सहायक होने के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चान्स प्रिंट और अंतर-राज्य अपराधियों का शीघ्र पता लगाने में सक्षम बना रही है।

यह एक NIST-अनुरूप वेब-आधारित एप्लिकेशन है जो फिंगरप्रिंट और अपराधियों के डेटा की रिकॉर्डिंग, प्रसंस्करण और खोज सुविधा का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। NAFIS सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रारूपों के अनुकूल है, जिससे यदि आवश्यक हो तो FBI या इंटरपोल जैसी एजेंसियों के साथ आपराधिक जानकारी के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करता है।

वर्तमान में, NAFIS लगभग 1022 स्थानों पर कार्यरत है जिसमें सभी फ़िंगरप्रिंट ब्यूरो, जिले, आयुक्तालय और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां जैसे सीबीआई, एनआईए, आसूचना ब्यूरो और एनसीबी शामिल हैं। इस व्यापक कवरेज और असाधारण खोज क्षमता के कारण, देश के किसी भी हिस्से से चान्स प्रिंट और अपराधियों के उंगलियों के निशान कुछ ही मिनटों में खोजे जा सकते हैं, जिसमें पहले महीनों लग जाते थे। के.अ.चि.ब्यरो NAFIS और इसके अनुप्रयोगों के विभिन्न पहलुओं पर राज्य पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए नियमित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी आयोजित करता है।

प्रमुख भूमिका

केन्द्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो में संदिग्ध अंगुल चिन्हों सहित सभी संदिग्ध दस्तावेजों का और उनकी पहचान के संबंध में दिए गए मत या अन्य संबंधित बिन्दुओं का परीक्षण किया जाता है। सभी सरकारी संस्थाओं एवं सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए यह सेवा निशुल्क है। प्राइवेट संस्थाओं या व्यक्तियों के मामले में, दस्तावेज़ सरकारी संस्थाओं के माध्यम से भेजे जाए।