अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम

सीसीटीएनएस के बारे में

अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क (सीसीटीएनएस)

workflow

अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (सीसीटीएनएस), भारत सरकार की राष्ट्रीय  ई-शासन योजना (NeGP) के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना है। इसका उद्देश्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना है। गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2009 में इसका शुभारंभ किया गया था। इस परियोजना का लक्ष्य अपराध संबंधी आँकड़ों के आदान-प्रदान एवं प्रबंधन के लिए देशव्यापी नेटवर्क स्थापित करके भारत में कानून प्रवर्तन व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना है। यह पुलिस प्रक्रियाओं, अभिलेखों एवं सेवाओं के डिजिटलीकरण और कम्प्यूटरीकरण को सुगम बनाती है तथा पुलिस थानों, जिलों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के बीच अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं के संग्रहण, भंडारण, पुनर्प्राप्ति और आदान-प्रदान को सक्षम बनाती है। सीसीटीएनएस  का उद्देश्य पुलिस कार्यप्रणाली की दक्षता एवं प्रभावशीलता में सुधार करना, अन्वेषण एवं अपराध विश्लेषण में सहायता प्रदान करना, कानून प्रवर्तन अभिकरणों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को सुगम बनाना तथा नागरिक-केंद्रित पुलिस सेवाओं को बेहतर बनाना है। सीसीटीएनएस  परियोजना के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। आर्थिक कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दिनांक 19.06.2009 को इस परियोजना को अनुमोदित किया था।

सीसीटीएनएस 2.0

माननीय केंद्रीय गृह मंत्री के अनुमोदन से सीसीटीएनएस  2.0 परियोजना के कार्यान्वयन हेतु सी-डैक (C-DAC), पुणे को नामांकन के आधार पर कार्य सौंपा गया। सी-डैक, पुणे ने परियोजना के समग्र प्रदेयों (Deliverables) को सात प्रमुख उपलब्धि-चरणों (M0 से M6) में विभाजित किया है। वर्तमान में सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) मुख्यालय में चिह्नित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ उपयोगकर्ता स्वीकृति परीक्षण (User Acceptance Testing–UAT) के दो सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र 15 से 19 सितंबर, 2025 तक जम्मू-कश्मीर, असम तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के लिए आयोजित किया गया। दूसरा सत्र 17 से 21 नवंबर, 2025 तक दिल्ली, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त, 3 से 7 नवंबर, 2025 तक एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें आठ गैर-CAS राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों—आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना—के लगभग 30 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।

इन परीक्षण सत्रों एवं कार्यशाला के दौरान सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  के 35 मॉड्यूलों का परीक्षण किया गया। इसमें भाग लेने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से एप्लिकेशन  की कार्यात्मक विशेषताओं एवं उपयोगकर्ता संबंधी पहलुओं पर बहुमूल्य सुझाव और प्रतिपुष्टि प्राप्त हुई। इन सुझावों एवं प्रतिपुष्टियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा तथा विचार-विमर्श किया गया और व्यावहारिक एवं अनुमोदित सुझावों को एप्लिकेशन  में सम्मिलित किया जा रहा है।

वर्तमान में चार चिह्नित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों—चंडीगढ़, असम, लद्दाख और उत्तराखंड—में प्रायोगिक परीक्षण (Pilot Testing) किया जा रहा है। इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में प्रायोगिक परीक्षण प्रारंभ करने से पूर्व, नामित पुलिस अधिकारियों को सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  की विशेषताओं एवं कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए NCRB मुख्यालय में 27 जनवरी, 2026 से 29 जनवरी, 2026 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। हाल ही में उत्तर प्रदेश को भी सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  के प्रायोगिक परीक्षण में सम्मिलित किया गया है। वर्तमान में चयनित पुलिस थानों में उन्नत एप्लिकेशन  के 54 मॉड्यूलों पर वास्तविक आँकड़ों की प्रविष्टि की जा रही है। प्रायोगिक परीक्षण कर रहे राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा सूचित समस्याओं पर विचार-विमर्श करने तथा उनका समाधान करने के लिए नियमित बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंस (VC) आयोजित की जा रही हैं। समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय रूप से कार्रवाई की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अपेक्षित सहायता प्रदान की जा रही है।

एप्लिकेशन  को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए, जहाँ भी संभव है, अन्वेषण अधिकारियों की सहायता हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence–AI) तथा मशीन लर्निंग (Machine Learning–ML) को समेकित किया जा रहा है। आपराधिक न्याय प्रणाली के अन्य स्तंभों तथा बाह्य अभिकरणों के साथ एकीकरण का कार्य भी वर्तमान में प्रगति पर है।

सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  ‘एक डेटा, एक प्रविष्टि’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अंतर्गत पुलिस कार्मिकों को किसी सूचना की प्रविष्टि केवल एक बार करनी होती है। एक प्रपत्र में दर्ज की गई सूचना समान प्रविष्टि-क्षेत्रों वाले अन्य प्रपत्रों में स्वतः भर जाती है। इससे अनेक प्रपत्रों में एक ही सूचना को बार-बार मैनुअल  रूप से दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

यह स्वचालित सूचना-पूर्ति सुविधा बार-बार आँकड़े दर्ज करने से जुड़े कार्यभार को उल्लेखनीय रूप से कम करती है और एक ही कार्य को दोहराने की आवश्यकता समाप्त करती है। एक बार दर्ज की गई सूचना एप्लिकेशन  के सभी संबंधित प्रपत्रों एवं अभिलेखों में स्वतः उपलब्ध हो जाने से बहुमूल्य समय की बचत होती है। बार-बार मैनुअल   टंकण की आवश्यकता कम होने से टंकण संबंधी त्रुटियों तथा आँकड़ों में विसंगतियों की संभावना भी काफी घट जाती है। समग्र रूप से, ‘एक डेटा, एक प्रविष्टि’ की व्यवस्था कार्य-उत्पादकता बढ़ाती है, आँकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करती है तथा पुलिस कार्मिकों को पुलिसिंग और अन्वेषण संबंधी मुख्य कार्यों पर अधिक समय देने में सक्षम बनाती है।

सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  का MedLEaPR, eCourts, eForensic, ePrison, eSakshya, CrPI तथा NAFIS आदि प्रणालियों के साथ एकीकरण किया जाएगा। आपराधिक न्याय प्रणाली के किसी भी स्तंभ में एक बार दर्ज की गई सूचना सीसीटीएनएस  2.0 एप्लिकेशन  के साथ साझा की जाएगी, जिससे पुलिस कार्मिकों को उसी सूचना को बार-बार दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस व्यवस्था से आँकड़ों में एकरूपता, अभिलेखों का मानकीकृत प्रबंधन, आँकड़ों की पुनरावृत्ति में कमी, हस्तचालित कार्य एवं त्रुटियों में कमी, परिचालन दक्षता में सुधार, आँकड़ों की अखंडता में वृद्धि तथा एकीकृत अनुप्रयोगों के बीच निर्बाध अंतःप्रचालनीयता सुनिश्चित होगी।

 

सीसीटीएनएस  2.0 की क्षमताएँ :

क. मॉड्यूलर संरचना एवं उन्नत अवसंरचना: सीसीटीएनएस  2.0 में मॉड्यूलर संरचना, माइक्रोसर्विसेज-आधारित स्तर, प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के कार्यभार के आधार पर पुलिस थानों के लिए उन्नत हार्डवेयर, निर्धारित बैंडविड्थ मानकों के अनुरूप बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी तथा DC–DR (डेटा सेंटर–आपदा पुनर्प्राप्ति) व्यवस्था सहित मेघराज 2.0 क्लाउड पर केंद्रीय होस्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इसकी अवसंरचना आवश्यकतानुसार विस्तार योग्य होगी।

ख. उन्नत यूजर इंटरफेस एवं उपयोगकर्ता अनुभव: सीसीटीएनएस  2.0 में यूजर इंटरफेस एवं यूजर एक्सपीरियंस (UI/UX) का पूर्ण पुनःअभिकल्पन किया गया है। इसमें मॉड्यूलर संरचना, माइक्रोसर्विसेज-आधारित स्तर, विभिन्न उपकरणों के अनुकूल उत्तरदायी इंटरफेस, उन्नत खोज सुविधा, डैशबोर्ड-आधारित नेविगेशन, ‘एक डेटा–एक प्रविष्टि’ व्यवस्था तथा संचालन को सरल बनाने वाली कार्यप्रवाह प्रणाली शामिल हैं।

ग. नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप कार्यप्रवाह: इसकी कार्यप्रवाह प्रणाली भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है।

घ. विभिन्न प्रणालियों के साथ एकीकरण: e-Courts, e-Prison, e-Forensic, MedLEaPR, e-Sakshya, CrPI एवं NAFIS, न्यायश्रुति (NyayShruti), भाषिणी (Bhashini) और वाहन (VAHAN) के साथ पूर्ण एकीकरण तथा आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों के बीच सूचनाओं का स्वचालित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा।

ङ. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाएँ: सीसीटीएनएस  2.0 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनेक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं, जिनमें AI की सहायता से प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) का प्रारूप तैयार करना, AI द्वारा केस डायरी तैयार करना, FIR का AI आधारित सारांश तैयार करना, अधिनियमों एवं धाराओं का AI आधारित पूर्वानुमान, अपराध प्रतिरूप विश्लेषण (Crime Pattern Analysis), अपराध करने की कार्यप्रणाली का विश्लेषण (Modus Operandi Analysis), कॉल विवरण रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण, AI चैटबॉट, AI आधारित प्रश्न-निर्माण सुविधा (AI Query Builder), AI आधारित खोज सुविधा, AI की सहायता से बीट संसाधनों का आवंटन, AI आधारित अपराध हॉटस्पॉट का दृश्यांकन शामिल हैं ।

च. उच्च विन्यास-क्षमता (High Configurability): इसमें अनुकूलन योग्य डैशबोर्ड, गतिशील कार्यप्रवाह प्रबंधन तथा उपयोगकर्ताओं और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार अधिसूचनाओं एवं अलर्ट की सेटिंग में परिवर्तन की सुविधा उपलब्ध होगी।

छ. बहु-उपयोगकर्ता संरचना (Multi-Tenancy Architecture): इस संरचना के अंतर्गत अनेक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र एक ही साझा प्लेटफॉर्म का सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकेंगे। इसमें प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के आँकड़ों को पृथक रखते हुए उनकी आवश्यकतानुसार विन्यास, अनुकूलन योग्य सेटिंग तथा विस्तार योग्य संसाधनों की सुविधा होगी। साथ ही, प्रत्येक इकाई के लिए विशिष्ट विन्यास एवं उन्नत सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

छ. पृथक विकास एवं परिचालन प्रतिबंध: ‘लेयर्ड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रेंट सर्किल’ (Layered Development & Constraint Circle) के माध्यम से प्रत्येक स्तर के विकास एवं परिचालन संबंधी प्रतिबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा। इससे प्रत्येक चरण में प्रभावी प्रबंधन, विस्तार-क्षमता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

छ. पृथक निष्पादन सेवाएँ (Segregated Performance Services): प्रबंधन एवं नियंत्रण के लिए अलग-अलग निष्पादन सेवाएँ लागू की जाएँगी। इससे संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग, प्रणाली की निगरानी तथा निष्पादन की निर्बाध निगरानी सुनिश्चित होगी।

भारत में पुलिस तंत्र की पृष्ठभूमि

पुलिस की कार्यप्रणाली में सूचना प्रौधोगिकी की क्षमता बढ़ाने के लिए पूर्व में बहुत सी पहल शुरू की गयी है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (रा.अ.रि.ब्यूरो) द्वारा परिचालित “अपराध एवं आपराधिक सूचना प्रणाली” (सी.सीआई.एस.) एवं “समेकित सामान्य पुलिस अनुप्रयोग” (सी.आई.पी.ए.), एवं राज्य द्वारा परिचालित कार्यक्रम जैसे की इ-काप्स (आंध्रप्रदेश), पुलिस सूचना प्रौद्योगिकी (कर्नाटक), थाना ट्रैकिंग प्रणाली (पश्चिम बंगाल), सी.ए.ए.आर.यू.एस (तमिलनाडू) एवं एच.डी(-)आई. आई.टी.एस.(गुजरात) आदि कुछ केंद्रीयकृत प्रारम्भिक कार्यक्रम हैं।

अपराध एवं अपराधी सूचना प्रणाली (सी.सी.आई.एस.) (1995-2004)

रा.अ.रि.ब्यूरो ने सी.सी.आई.एस. का गठन वर्ष 1995 में शुरू किया था, जिसमें राज्य एवं जिला पुलिस मुख्यालय इस परियोजना में शामिल किए गए थे। सी.सी.आई.एस. मुख्यतः अपराध एवं अपराधियों से संबन्धित डाटाबेस को बनाने की एक पहल थी जो निगरानी अभिकरणों जैसे राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (रा.अ.रि.ब्यूरो), राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरों(रा.अ.रि.ब्यूरों) तथा जिला अपराध ब्यूरों(जि.अ.रि.ब्यूरों) द्वारा अपराध निगरानी के लिए प्रयोग किया जा सके और अपराध तथा अपराधियों से संबंन्धित जानकारियों के समीक्षात्मक आंकडे राज्यों तथा निगरानी अभिकरणों को सुगमता से उपलब्ध कराया जा सके। सी.सी.आई.एस. प्रारम्भ में यूनिक्स औ एस और इंग्रेस आधारित डाटाबेस है, लेकिन फिर विंडोज प्लैटफार्म में इसे पोर्ट कर दिया गया। मेसर्स एच.सी.एल एवं आई.सी.आई.एम से कुल 594 कम्प्युटर सिस्टम खरीदे गए हैं जिनमें 11 अतिरिक्त खरीदे हुए कम्प्यूटर सिस्टम भी शामिल हैं। समेकित अन्वेषण फार्म (आई.आई.एफ.) का प्रारूप राज्य पुलिस के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के उपरांत बनाया गया है। परियोजना के अंतर्गत आंकड़ों की प्रविष्टियाँ का कार्य वर्ष 1995 से आरंभ हुआ था। वर्ष 1995 से 1999 के दौरान सी.सी.आई.एस. साफ्टवेयर के चार संस्करणों का जारी किया गया है। वर्ष 2000 में वाई2के समस्या के कारण सी.सी.आई.एस. डाटाबेस का पोर्ट यूनिक्स/इंग्रेस से विंड़ोज/एसक्यूएल में परिवर्तित कर दिया गया। उन्नत कम्प्यूटरों को सम्पूर्ण देश में मई 2000 से जनवरी, 2001 तक 740 स्थानों में स्थापित किया गया। नई विंडो आधारित एप्लिकेशन साफ्टवेयर 2के.1 के प्रथम संस्करण को जुलाई 2000 में जारी किया गया। 2के.1 के दूसरे संस्करण को मई 2001 में जारी किया गया था। सी.सी.आई.एस एम.एल01 (बहुभाषी (हिन्दी/अंग्रेजी) संस्करण सितम्बर 2002 में जारी किया गया था।

सी.सीआई.एस. डाटा का प्रयोग गुमशुदा लोगों से संबंधित रिपोर्ट को ऑनलाइन प्रकाशन में प्रयोग किया जाता है तथा रा.अ.रि.ब्यूरो वैबसाइट के माध्यम से डाटा को ऑनलाइन जानकारी सुविथा के आधार के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसका प्रयोग रा.अ.रि.ब्यूरो देशव्यापी अपराध रिपोर्ट के वार्षिक प्रकाशन के रूप में करता है। सी.सी.आई.एस. पूर्ण रूप से अपराध एवं अपराधियों की सूचना पर ध्यान केन्द्रित करता है पुलिस के अन्य प्रकार के कार्य क्षेत्र से सरोकार नहीं रखता।

सामान्य समेकित पुलिस एप्लकेशन (सी.आई.पी.ए.) (2004-2009)

सामान्य समेकित पुलिस एप्लिकेशन (सी.आई.पी.ए.) का आरम्भ रा.अ.रि.ब्यरो द्वारा वर्ष 2004 में सी.सी.आई.एस. के आरम्भ के पश्चात किया गया था, जिसकी रचना ग्राहक-सर्वर संरचना पर एन.आई.सी लाइनेक्स प्लेटफार्म पर जावा एवं पोष्टग्रेस एसक्यूएल आंकड़ाबेस का प्रयोग किया गया है। एफ.आई.आर सूचना का कम्प्युटर प्रणाली में पंजीयन करना तथा उसकी प्रतियों का मुद्रांकन एवं पुलिस स्टेशन रजिस्टरों का कम्प्यूटर प्रणाली में सृजन करना एवं कॉपी करने इत्यादि लाभ सी.आई.पी.ए से प्राप्त हुए हैं।

सी.सी.आई.एस एक बहुभाषी प्रणाली थी, जिसने प्रणालियों (कार्य प्रगति) का स्वसंचालन डाटा के प्रारम्भिक स्रोतों से ही शुरू कर दिया था उदाहरणार्थ, दंड प्रक्रिया संहिता के आधार पर पुलिस थानों एवं अपराध तथा अपराधी सूचना प्रणाली विकसित करना। यह जानकारी/रिपोर्ट एवं संगठित अपराध विश्लेषण को जारी करने में अपराध अभिलेख को सुव्यस्थित ढ़ंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रभावशाली तरीका उपलब्ध कराता है।

सी.सी.आई.एस प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) के पंजीयन, घटनाओं के अन्वेषण एवं अभियोग प्रकिया के लिए कार्य करता है। यह कट्टर अपराधियों, आदतन अपराधियों एवं संगठित गिरोह के डाटा बेस भी रखता है।

तथापि ऐसा महसूस किया गया कि केवल एकल कार्य प्रणाली, अपराध अन्वेषण एवं अपराधी खोजने के क्षेत्र में विस्तृत नतीजे नहीं उपलब्ध करा पा रही थी, जो कि आवश्यक है। इस कारण से ही गृह मंत्रालय ने अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क (सी.सी.टी.एन.एस.) कार्यक्रम प्रारम्भ करने का निर्णय किया।

सीसीटीएनएस को इस तरह से लागू किया गया है जहां राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। सीसीटीएनएस को "केंद्रीकृत योजना और विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन" के एनईजीपी सिद्धांत के अनुरूप लागू किया गया है। गृह मंत्रालय और एनसीआरबी, कुछ प्रमुख घटकों के विकास और कार्यक्रम की निगरानी और समीक्षा में राज्यों के भीतर पुलिस नेतृत्व के सहयोग से कार्यक्रम की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश राज्य स्तर पर योजना और कार्यान्वयन को संचालित कर रहे है। केंद्र (गृह मंत्रालय और एनसीआरबी) की भूमिका मुख्य रूप से नियोजन के आसपास केंद्रित है जिसमे कोर एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) प्रदान करना (राज्यों में उनकी आवश्यकता के अनुकूल परिवर्तन करना और तैनात किया जाना है। राज्य इसे अपने स्तर पर कार्यान्वित करते हैं और उनके पास इसका स्वामित्व भी रहता है । सीसीटीएनएस के कार्यान्वयन में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद के बजाय "एकीकृत सेवा वितरण" दृष्टिकोण अपनाया है। राज्य स्तर पर सीसीटीएनएस कार्यान्वयन को केंद्रीय विशेषता "सेवाओं का बंडल" के रूप में स्थापित किया गया है । इसके अनुसार, प्रत्येक राज्य ने एक सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई) का चयन किया है जो सीसीटीएनएस के सभी घटकों के लिए राज्य के लिए संपर्क का एकल बिंदु है। इन घटकों में एप्लिकेशन (गृह मंत्रालय द्वारा प्रदान किए गए कोर एप्लिकेशन में किए गए परिवर्तन), हार्डवेयर, संचार अवसंरचना, संबद्ध, क्षमता निर्माण और हैंडहोल्डिंग, आदि जैसी सेवाएं शामिल हैं।

सीसीटीएनएस योजना के उद्देश्यों को व्यापक रूप से निम्नानुसार सूचीबद्ध किया जा सकता है:

  • पुलिस थानों की कार्यप्रणाली को स्वचालित बनाकर पुलिस व्यवस्था को नागरिक-अनुकूल एवं अधिक पारदर्शी बनाना।
  • सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के प्रभावी उपयोग के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाओं की डिलीवरी में सुधार करना।
  • नागरिक पुलिस के अन्वेषण अधिकारियों को अपराधों के अन्वेषण एवं अपराधियों का पता लगाने में सहायता हेतु आवश्यक उपकरण, प्रौद्योगिकी और सूचना उपलब्ध कराना।
  • विधि एवं व्यवस्था, यातायात प्रबंधन आदि जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार करना तथा पुलिस थानों, जिलों, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र मुख्यालयों और अन्य पुलिस अभिकरणों के बीच परस्पर संवाद एवं सूचना के आदान-प्रदान को सुगम बनाना।
  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पुलिस बल के बेहतर प्रबंधन में सहायता प्रदान करना।
  • न्यायालयों में मामलों की प्रगति सहित, मामलों की प्रगति की निगरानी को सुगम बनाना।
  • मैनुअल एवं अनावश्यक अभिलेखों के रख-रखाव को कम करना।

CCEA की टिप्पणी के अनुसार, सीसीटीएनएस परियोजना के अंतर्गत पुलिस पदानुक्रम अर्थात सर्कल, उप-प्रभाग, जिले, रेंज, जोन, पुलिस मुख्यालय, SCRBX तथा फिंगर प्रिंट ब्यूरों, फोरेंसिक प्रयोगशाला इत्यादि जैसी जांच एवं अन्य उद्देश्यों के लिए सहायता एवं जानकारी प्रदान करने के लिए अपेक्षित डाटाबेस वाले वैज्ञानिक एवं तकनीकि संगठन वाले 6000 उच्चतम कार्यालयों के अलावा पूरे देश में 14000 पुलिस थानों को स्वाचालित किए जाने का प्रस्ताव है।

  • नागरिक/नागरिक समूह
  • गृह मंत्रालय एवं रा.अ.रि.ब्यूरो
  • राज्य पुलिस विभाग
  • न्यायालय, पासपोर्ट कार्यालय, यातायात विभाग, अस्पताल इत्यादि जैसे राज्यों के बाहरी विभाग।
  • अन्य कानून प्रवर्तन अभिकरण।
  • गैर सरकारी/ निजी क्षेत्र संगठन

सीसीटीएनएस के सफल क्रियान्वयन के परिकल्पित अपेक्षित लाभ निम्नलिखित हैः

क) पुलिस विभाग के लाभ

  • अन्वेषण कार्यों को सुगम एवं प्रभावी बनाने के लिए उन्नत उपकरण उपलब्ध कराता है।
  • अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीकृत संग्रह उपलब्ध कराता है, जिसमें अपराधियों की छवियाँ एवं अंगुलिचिह्न शामिल हैं तथा उन्नत खोज सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
  • अपराध के प्रतिरूपों एवं अपराध करने की कार्यप्रणाली के विश्लेषण की क्षमता को बढ़ाता है।
  • सड़क दुर्घटनाओं एवं अन्य दुर्घटनाओं के विश्लेषण की क्षमता में सुधार करता है।
  • अपराध एवं यातायात संबंधी विश्लेषण के परिणामों को जमीनी स्तर पर कार्यरत पुलिस अधिकारियों तक शीघ्र पहुँचाने में सहायता करता है।
  • नियमित एवं आवश्यकतानुसार रिपोर्ट तैयार करने तथा पुलिस थानों के अभिलेखों का प्रबंधन करने जैसे कार्यालयीन कार्यों में कार्यभार कम करता है।
  • विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों के बीच ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर सहयोगात्मक वातावरण विकसित करता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक सूचना विनिमय प्रणालियों के माध्यम से बाह्य हितधारकों के साथ समन्वय एवं संचार को बेहतर बनाता है।

ख) अन्वेषण अधिकारियों (IO) को लाभ

  • अन्वेषण के विभिन्न चरणों में अधिकारियों की सहायता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को एकीकृत करता है।
  • ‘एक डेटा, एक प्रविष्टि’ सिद्धांत को लागू करता है, जिससे अन्वेषण प्रक्रिया के दौरान आँकड़ों की बार-बार प्रविष्टि की आवश्यकता समाप्त होती है।
  • अन्वेषण अधिकारियों को केस बास्केट (Case Basket) के माध्यम से एक ही विंडो पर मामले के सभी घटकों को देखने, अद्यतन करने, उनकी प्रगति की निगरानी करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • अन्वेषण अधिकारियों की निगरानी, विश्लेषण एवं निर्णय लेने संबंधी आवश्यकताओं के लिए गतिशील एवं भूमिका-आधारित डैशबोर्ड उपलब्ध कराता है।
  • डेस्कटॉप, टैबलेट एवं मोबाइल उपकरणों के अनुकूल आधुनिक, उत्तरदायी एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस उपलब्ध कराता है, जिससे अधिकारी किसी भी समय और कहीं से भी एप्लिकेशन का उपयोग कर सकते हैं।
  • केस डायरी तैयार करने के लिए घटनाओं पर आधारित, AI-सहायता प्राप्त एवं संपादन योग्य स्वतः सुझाव उपलब्ध कराता है।
  • अपराध की श्रेणी के आधार पर गतिशील अन्वेषण जाँच-सूचियाँ उपलब्ध कराता है, जिससे अन्वेषण अधिकारियों को जाँच के विभिन्न चरणों में मार्गदर्शन मिलता है।
  • विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पुलिस थानों एवं उच्चतर कार्यालयों के बीच शिकायतों, प्रथम सूचना रिपोर्टों (FIR) तथा अन्य पंजीकरणों के हस्तांतरण हेतु सुव्यवस्थित कार्यप्रवाह उपलब्ध कराता है।
  • e-Courts, e-Prison, e-Forensic, MedLEaPR, e-Sakshya, CrPI, NAFIS, NyayShruti, Bhashini एवं VAHAN के साथ एकीकरण के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों के बीच सूचनाओं का स्वचालित आदान-प्रदान सुगम बनाता है।

ग) गृह मंत्रालय/राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को लाभ

  • देश के सभी पुलिस थानों में अपराध एवं अपराधियों से संबंधित आँकड़ों के संग्रहण हेतु मानकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराता है।
  • देशभर में अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं तक त्वरित एवं सुगम पहुँच प्रदान करता है, जिससे अपराध की प्रवृत्तियों एवं प्रतिरूपों का विश्लेषण करना आसान होता है।
  • विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में अपराध करने की कार्यप्रणाली के आधार पर अपराध के प्रतिरूपों की पहचान करने तथा अपराध की रोकथाम में सहायता हेतु राज्य पुलिस विभागों को संबंधित सूचनाएँ उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाता है।
  • संसद, नागरिकों एवं नागरिक समूहों की पूछताछ तथा सूचना का अधिकार (RTI) संबंधी आवेदनों का त्वरित एवं सटीक उत्तर देने की क्षमता बढ़ाता है।
  • भविष्य में अपराध एवं अपराधियों से संबंधित प्रणालियों के सरल, किफायती एवं सुगम विस्तार को सक्षम बनाता है।

घ) नागरिकों को लाभ

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की नागरिक सेवाएँ

सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए अपने-अपने नागरिक पोर्टल के माध्यम से निम्नलिखित नौ सेवाएँ उपलब्ध कराना अनिवार्य है:

  • शिकायतें दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • दर्ज शिकायतों की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) की प्रतियाँ प्राप्त करने एवं डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • गिरफ्तार व्यक्तियों एवं वांछित अपराधियों का विवरण उपलब्ध कराता है।
  • लापता एवं अपहृत व्यक्तियों का विवरण उपलब्ध कराता है।
  • चोरी किए गए एवं बरामद वाहनों, शस्त्रों तथा अन्य संपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराता है।
  • जुलूसों, आयोजनों, प्रदर्शनों, विरोध-प्रदर्शनों तथा अन्य गतिविधियों से संबंधित अनुरोधों सहित विभिन्न अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) को जारी करने एवं उनके नवीनीकरण की सुविधा प्रदान करता है।
  • घरेलू सहायकों, किरायेदारों, रोजगार, पासपोर्ट आवेदकों एवं वरिष्ठ नागरिकों आदि के लिए सत्यापन सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
  • पुलिस से संबंधित प्रपत्रों को ऑनलाइन देखने एवं डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करता है।

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त नागरिक-केंद्रित सेवाओं को अनुकूलित करके उपलब्ध करा सकते हैं। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के नागरिक पोर्टल तक पहुँचने का वेब पता है- :https://digitalpolice.gov.in/