भारत में अंगुलि-चिह्न 2024 , इस प्रतिष्ठित श्रृंखला का 28 वां वार्षिक प्रकाशन है, जिसमें वर्ष 2024 के दौरान केंद्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो (सीएफपीबी) और राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो (एसएफपीबीएक्स) की प्रगति, उपलब्धियों और नवाचारों की विस्तृत रिपोर्ट निहित है। इस प्रकाशन में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों, पहलों और परियोजनाओं का सारांश प्रस्तुत किया गया है जिसमें अंगुलियों के चिह्नों की पहचान संबंधी प्रौद्योगिकियों में प्रगति, डेटाबेस का विस्तार और रखरखाव, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और क्षमता निर्माण संबंधी उपाय शामिल हैं। इसमें प्रासंगिक कानूनों, अंगुलि चिह्नों की जांच में उपयोग में लाये गए आधुनिक उपकरणों और अंगुलि चिह्न विज्ञान से संबंधित उल्लेखनीय प्रकाशनों जैसी महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री भी शामिल है। यह संस्करण नए प्रचलनों, शोध और उत्तम परिपाटियों की व्यापक जानकारी प्रदान करता है, जिससे यह अंगुलि चिह्न विज्ञान और आपराधिक जांच एवं न्याय व्यवस्था में इसके उपयोग से जुड़े पेशेवरों, शिक्षाविदों और विधि प्रवर्तन कर्मियों के लिए एक विश्वसनीय संसाधन बन जाता है।
भारत में अंगुलि चिह्न विज्ञान की शीर्ष संस्था के रूप में केंद्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो (सीएफपीबी), राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो और केंद्र शासित प्रदेशों को समन्वय, मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करता है। वर्ष 2024 में, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, असम राइफल्स, सशस्त्र सीमा बल, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, बैंक, रेलवे भर्ती बोर्ड, डाकघर, कर्मचारी चयन आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो आदि जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कुल 1348 दस्तावेज़ मामले प्राप्त हुए। कुल 1687 दस्तावेज़ मामले जांच के लिए उपलब्ध थे, जिनमें पिछले वर्ष से लंबित 169 मामले और अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ प्राप्त 170 मामले शामिल थे। सीएफपीबी के अंगुलि चिह्न विशेषज्ञों ने वर्ष के दौरान 1544 दस्तावेज़ मामलों की जांच की और विशेषज्ञ राय प्रदान की।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने राष्ट्रीय स्वचालित अंगुलि चिह्न पहचान प्रणाली (नेफिस) को लागू किया है, जो एक वेब-आधारित प्रणाली है और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आपराधिक अंगुलि चिह्न डेटा का संग्रह है। अंगुलि चिह्न डेटा के सुरक्षित संग्रह, वास्तविक समय में खोज और राष्ट्रव्यापी साझाकरण ने पुलिस को अंगुलि चिह्न के माध्यम से अपराधियों का पता लगाने में काफी हद तक सहायक रही है। नेफिस को सीसीटीएनएस और राज्य-स्तरीय एफिस के साथ एकीकृत करने से अपराधियों की त्वरित पहचान के लिए एक प्रभावी प्रणाली विकसित हुई है। इसके अलावा, नेफिस परियोजना के तहत पोर्टेबल लाइव-स्कैन उपकरणों की उपलब्धता ने फील्ड स्तर के अधिकारियों को अंगुलियों के चिह्न को आसानी से सत्यापित करने में सक्षम बनाया है। प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का केंद्रीय सर्वर पर अपना सुरक्षित वर्चुअल स्पेस है, जो डेटा के स्वामित्व और एक्सेस कंट्रोल को सुनिश्चित करता है। वर्ष 2023 में, नेफिस को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा "डिजिटल बदलाव के लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन में उत्कृष्टता" के लिए गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया था। नेफिस आदतन अपराधियों की पहचान करने में सहायक है, इसने समय पर अपराध का पता लगाकर पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया है और अंततः एक समेकित डेटाबेस बनाए रखने में सहयोग प्रदान किया है। अपनी स्केलेबल संरचना और भविष्य में बायोमेट्रिक एकीकरण की क्षमता के कारण नेफिस भारत के डिजिटल पुलिसिंग तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। वर्तमान में, नेफिस को सभी जिलों, पुलिस आयुक्तालयों, राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो और केंद्रीय विधि परिवर्तन एजेंसियां जैसे एनआईए, सीबीआई और एनसीबी और आईबी को कवर करते हुए 1377 स्थानों पर चालू किया गया है। गृह मंत्रालय ने अब आईसीजेएस 2.0 के तहत आबंटित धनराशि का उपयोग करके नेफिस को सभी पुलिस थानों तक विस्तारित करने के एनसीआरबी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
वर्ष 2024 में, केंद्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो (सीएफपीबी) ने 56 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें नेफिस एनरोलमेंट यूज़र्स प्रशिक्षण, नेफिस में विशेषज्ञों का प्रशिक्षण और एआईबीई के लिए पुनश्चर्या कोर्स शामिल थे। इन कार्यक्रमों के साथ-साथ, एनसीआरबी ने अंगुलि चिह्न विज्ञान और चांस प्रिंट डेवलपमेंट के विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए कार्यशालाएं, इंटर्नशिप कार्यक्रम और वेबिनार भी आयोजित किए। इन पहलों से पुलिसकर्मियों, अंगुलि चिह्न विशेषज्ञों, फोरेंसिक विज्ञान के छात्रों और विधि प्रवर्तन अधिकारियों सहित कुल 1,959 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और लाभान्वित हुये।
दिनांक 30 से 31 जनवरी, 2025 को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), नई दिल्ली में अंगुलि चिह्न ब्यूरो के निदेशकों का 25वां अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में विभिन्न अंगुलि चिह्न ब्यूरो, सीएफएसएल-डीएफएसएस, एनआईए, एफएसएल के प्रतिनिधियों और फोरेंसिक विज्ञान एवं अपराध विज्ञान पाठ्यक्रम चलाने वाले विभिन्न महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। दिनांक 28 से 30 सितंबर, 2024 तक अंगुलि चिह्न विशेषज्ञों के लिए अखिल भारतीय बोर्ड परीक्षा (एआईबीई) 2024, आयोजित की गई।
इस अध्याय में राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो के अंगुलि चिह्न विशेषज्ञों द्वारा अंगुलि चिह्न साक्ष्य के आधार पर सुलझाए गए महत्वपूर्ण मामलों का विवरण दिया गया है। 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 128 मामले प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें से 74 मामलों को उनकी गंभीरता, खोई/बरामद संपत्ति के मूल्य, सिलसिलेवार मामलों की पहचान और नेफिस के माध्यम से सुलझाए गए मुख्य मामलों के आधार पर इस अध्याय में सम्मिलित और संकलित किया गया है।
अंगुलि चिह्न विशेषज्ञ की प्राथमिक जिम्मेदारी घटना स्थलों पर अपराधियों द्वारा छोड़े गए चांस प्रिंट को डेवलप करना और उनका मिलान संदिग्धों के अंगुलि चिह्न या आपराधिक डेटाबेस से करके अपराध और अपराधी के बीच संबंध स्थापित करना है। अंगुलि चिह्न विशेषज्ञ गिरफ्तार व्यक्तियों की फिंगर प्रिंट स्लिप की जांच करके डेटाबेस में उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी भी प्राप्त करते हैं। वर्ष 2024 के दौरान, राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो, पुलिस और अन्य एजेंसियों की अंगुलि चिह्न इकाइयों ने 1,04,811 घटना स्थलों का दौरा किया। 29,290 मामलों में, चांस प्रिंट पाए गए और उनका विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 1,04,261 चांस प्रिंट प्राप्त हुए, जिनमें से 73,842 तुलना के लिए उपयुक्त पाए गए। कुल 4,885 चांस प्रिंट को नेफिस में सफलतापूर्वक खोजा/पहचाना गया।
1. सीएफपीबी
वर्ष 2024 के दौरान, सीएफपीबी ने 16 चांस प्रिंट मामलों की जांच की, जिनमें से 35 चांस प्रिंट पर कार्रवाई की गई और इनमें से 9 चांस प्रिंट का पता लगाया गया। इसके अतिरिक्त, राज्य विशेषज्ञों द्वारा सुपर एलवीक्यू और सुपर आरवीक्यू के 42 भिन्न राय के मामलों में अंतिम राय प्रदान की गई। वर्ष के दौरान 1348 दस्तावेज़ मामले प्राप्त हुए और अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ दूसरी बार प्राप्त लंबित मामलों सहित कुल 1544 मामलों की जांच की गई और उनका निपटारा किया गया। वर्ष के अंत में, 143 मामले जांच के लिए लंबित रहे। इसके अलावा, जनसांख्यिकी के माध्यम से विशेष सर्च के 82 मामले प्राप्त हुए, जिनमें से 49 का पता लगाया गया/पहचान की गई और सर्च के लिए प्राप्त 203 इंटरपोल मामलों में से एक इंटरपोल मामले का पता लगाया गया।
2. एसएफपीबी
2024 के दौरान, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दोषसिद्ध और गिरफ्तार व्यक्तियों के 24,78,820 दस अंकों वाले अंगुलि चिह्न रिकॉर्ड प्राप्त हुए। वर्ष 2024 में एसएफपीबी को कुल 1,587 दस्तावेज मामले प्राप्त हुए, जिनमें पिछले वर्ष के 604 लंबित मामले भी शामिल थे, जिससे एसएफपीबी के पास जांच के लिए उपलब्ध मामलों की कुल संख्या 2,191 हो गई। इनमें से 1,609 मामलों की जांच की गई, जबकि 582 मामले एसएफपीबी के पास लंबित रहे। 263 मामलों में, विभिन्न एसएफपीबी विभागों के अंगुलि चिह्न विशेषज्ञ साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए न्यायालयों के समक्ष उपस्थित हुये।
निम्नलिखित तालिका वर्ष 2024 के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अंगुलि चिह्न आदान-प्रदान के अखिल भारतीय आँकड़े प्रस्तुत करती है:-
| राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो की आदान-प्रदान गतिविधियां | ||||
| प्राप्त हुईं दोषसिद्ध व्यक्तियों की स्लिप | प्राप्त हुईं सर्च स्लिप | अंगुलि चिह्न दस्तावेज़ मामलों की जांच | विकसित चांस प्रिंट (तुलना के लिए उपयुक्त) | ट्रेस/पहचाने गए चांस प्रिंट |
| 150650 | 2328170 | 1609 | 73842 | 4885 |
यह अध्याय दोषसिद्धि दर उपलब्ध कराये गए आंकड़ों में विसंगतियों के कारण और राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो से प्राप्त आंकड़ो की अंतर-तुलना जैसे सहवर्ती कारकों के विश्लेषण के साथ-साथ रिकॉर्ड स्लिप, सर्च स्लिप, दस्तावेज़ मामलों, चांस प्रिंटों जैसी मुख्य गतिविधियों के चित्रण और विभिन्न शीर्षकों के तहत अपराधों के वर्गीकरण संबंधी विवरण देता है।
मध्य प्रदेश राज्य ने वर्ष 2024 में गंभीर उपहति, हत्या, हत्या का प्रयास, महिलाओं पर हमले और बलात्संग के लिए अपराधियों को दोषी ठहराने के लिए सबसे अधिक अंगुलि चिह्न स्लिप दर्ज की। उत्तर प्रदेश,हरियाणा और महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में दोषसिद्धि स्लिप दर्ज की गई। गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में गिरफ्तारी स्लिप की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और हिमाचल प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में भी उनकी जनसंख्या और अपराध दर के अनुपात में अंगुलि चिह्न से संबंधित गिरफ्तारी स्लिप की संख्या काफी अधिक रही। तमिलनाडु, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में से प्रत्येक राज्य में वर्ष 2024 में 100 से अधिक दस्तावेज़ मामलों की जांच की गई। वर्ष 2024 में ट्रेस चांस प्रिंट की सबसे अधिक संख्या के मामले में तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश शीर्ष पर रहे।
इसके अलावा, विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि हत्या, गंभीर उपहति, हत्या के प्रयास और बलात्संग के मामलों में दोषी पाए गए व्यक्तियों के रिकॉर्ड स्लिप की संख्या मानव शरीर से संबंधित अन्य आईपीसी/बीएनएस अपराधों की तुलना में अधिक थी। सर्च स्लिप में व्यपहरण एवं अपहरण, महिलाओं पर हमले और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामलों में भी तीव्र वृद्धि देखी गई।
संपत्ति संबंधी अपराधों के संदर्भ में, चोरी, सेंधमारी, जालसाजी, छल, कपट और डकैती में शामिल लोगों की तुलना में अन्य आईपीसी/बीएनएस श्रेणियों के तहत गिरफ्तार और दोषसिद्ध व्यक्तियों की संख्या अधिक थी। वहीं, विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत आने वाले अपराधों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार और दोषसिद्ध व्यक्तियों की संख्या दूसरे स्थान पर थी।
इस अध्याय में नेफिस सॉफ्टवेयर के विभिन्न पहलुओं जैसे परिचय, नेफिस की कार्यप्रणाली और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 31 दिसंबर 2024 तक नेफिस की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है। नेफिस परियोजना के तहत, सभी एसएफपीबी, आयुक्त कार्यालय और जिलों तथा केंद्रीय विधि प्रवर्तन एजेंसियों में कुल 1,377 कार्य केंद्र स्थापित किए गए थे। 31 दिसंबर 2024 तक सीएफपीबी/नेफिस डेटाबेस में दोषी ठहराए गए, गिरफ्तार किए गए और अन्य व्यक्तियों की 1,07,42,570 दस अंकीय अंगुलि चिह्न स्लिप मौजूद थीं।
2024 के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में नेफिस की स्थिति के अखिल भारतीय आंकड़े
| आबंटित वर्क स्टेशनों की संख्या | चालू किए गए वर्क स्टेशन | 31 दिसंबर 2024 को नेफिस डेटाबेस का आकार | सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या | सर्च किए गए चांस प्रिंटों की कुल संख्या (अंतर्राज्जीय) |
| 1377 | 1377 | 10742570 | 3217 | 2355 |
सीएफपीबी/एनसीआरबी पूरे भारत में राज्य अंगुलि-चिह्न ब्यूरो के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कई प्रशिक्षण और पुनश्चर्या पाठ्यक्रम आयोजित करता है। यह अध्याय कैलेंडर वर्ष 2024 के दौरान आयोजित क्षमता निर्माण और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबन्धित जानकारी प्रदान करता है।
| सीएफपीबी द्वारा प्रशिक्षित व्यक्तियों की संख्या | एसएफपीबी द्वारा प्रशिक्षित व्यक्तियों की संख्या | ||
| सीएफपीबी में (एनसीआरबी मुख्या.एवं सीएफपीबी कोलकाता) | एसएफपीबी/केंद्र शासित क्षेत्र में | एसएफपीबी में प्रशिक्षित स्वयं के कार्मिक | एसएफपीबी में प्रशिक्षित अन्य अधिकारी |
| 1701 | 258 | 2500 | 42679 |
उपयोगी जानकारी जैसे अंगुलि चिह्न विज्ञान के प्रवर्तक, भारत में अंगुलिचिह्न से संबन्धित कानून, विभिन्न अंगुलि चिह्न ब्यूरो में तैनात कर्मचारी प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न प्रकार के उपकरणों की उपलब्धता, एआईबीई टॉपरों की सूची, अंगुलि चिह्न पर मानक पुस्तकें, राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो के संपर्क विवरण और और विभिन्न राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के नेफिस नोडल अधिकारियों की सूची, इस प्रकाशन के अनुलग्नक में दी गई है।